कुपोषण (Malnutrition)

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कुपोषण (Malnutrition) – 

 परिभाषा (Definition):

कुपोषण वह स्थिति है जब शरीर को आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलते या असंतुलित मात्रा में मिलते हैं, जिससे शारीरिक, मानसिक और प्रतिरक्षा संबंधी कार्य प्रभावित होते हैं। यह स्थिति अत्यधिक कम पोषण (Undernutrition) या अत्यधिक भोजन (Overnutrition) दोनों में हो सकती है।

 कुपोषण के प्रकार (Types of Malnutrition):

1. अल्पपोषण (Undernutrition):

जब व्यक्ति को शरीर की आवश्यकता से कम पोषक तत्व मिलते हैं, तो उसे अल्पपोषण कहते हैं। इसके अंतर्गत चार उप-प्रकार आते हैं:

  • प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण (PEM): मुख्य रूप से बच्चों में। इसके दो रूप होते हैं:
    • क्वाशियोर्कर (Kwashiorkor): प्रोटीन की कमी से
    • मरास्मस (Marasmus): कुल ऊर्जा और प्रोटीन की अत्यधिक कमी से
  • सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी (Micronutrient Deficiency): जैसे आयरन, आयोडीन, विटामिन A, फोलिक एसिड की कमी।

2. अतिपोषण (Overnutrition):

जब व्यक्ति जरूरत से अधिक भोजन या विशेष पोषक तत्वों का सेवन करता है, विशेष रूप से वसा और शर्करा, जिससे मोटापा, हृदय रोग, डायबिटीज़ जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं।

 कुपोषण के कारण (Causes of Malnutrition):

  1. अपर्याप्त आहार: भोजन में पोषक तत्वों की कमी
  2. गरीबी और खाद्य असुरक्षा: भोजन की उपलब्धता न होना
  3. स्वच्छता और साफ पानी की कमी: बार-बार संक्रमण से पोषण घटता है
  4. शैक्षणिक जागरूकता की कमी: उचित पोषण के ज्ञान का अभाव
  5. बाल-विवाह और किशोर गर्भावस्था: माँ स्वयं कमजोर होती है, जिससे बच्चा भी कुपोषित होता है
  6. बार-बार बीमार पड़ना: जैसे दस्त, निमोनिया
  7. दूध छुड़ाने की गलत विधियाँ और पूरक आहार की कमी

 कुपोषण के लक्षण (Symptoms of Malnutrition):

  1. अत्यधिक कमजोरी, थकावट
  2. बच्चों में वृद्धि रुकना या बहुत धीमा होना
  3. त्वचा रूखी, बाल झड़ना
  4. पेट फूलना (Kwashiorkor में)
  5. हड्डियाँ उभर जाना (Marasmus में)
  6. संक्रमण जल्दी-जल्दी होना
  7. एनीमिया (खून की कमी)

 अतिपोषण के लक्षण:

  1. मोटापा
  2. थकान, आलस्य
  3. उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल
  4. मधुमेह (Type-2)
  5. दिल संबंधी समस्याएँ

 कुपोषण के प्रभाव (Effects of Malnutrition):

  1. शारीरिक विकास में रुकावट (विशेषकर बच्चों में)
  2. बौद्धिक क्षमता में कमी – पढ़ाई में ध्यान न लगना, स्मृति कमजोर
  3. रोगों से लड़ने की क्षमता में कमी – बार-बार बीमार पड़ना
  4. मातृ और शिशु मृत्यु दर में वृद्धि
  5. श्रम क्षमता में कमी – वयस्कों की उत्पादकता घटती है
  6. राष्ट्रीय आर्थिक हानि – कुपोषणग्रस्त पीढ़ियाँ देश की प्रगति में बाधा बनती हैं

 कुपोषण की रोकथाम के उपाय (Prevention of Malnutrition):

  1. संतुलित आहार का सेवन: सभी पोषक तत्व उचित मात्रा में लें
  2. पोषण शिक्षा: बच्चों, महिलाओं और परिवारों को पोषण के प्रति जागरूक करना
  3. स्वच्छता और साफ पानी: संक्रमण रोकने के लिए
  4. स्तनपान: जन्म के पहले छह महीने तक केवल माँ का दूध
  5. शिशु को सही समय पर पूरक आहार देना (6 माह बाद)
  6. टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच
  7. सरकारी योजनाएं: जैसे –
    1. आंगनवाड़ी सेवाएँ (ICDS)
    2. मिड डे मील योजना
    3. पोशन अभियान
    4. अन्नपूर्णा योजना
    5. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना

 निष्कर्ष (Conclusion):

कुपोषण एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या है जो न केवल बच्चों और महिलाओं को प्रभावित करती है, बल्कि पूरे राष्ट्र की कार्यक्षमता और विकास को भी धीमा कर देती है। इसकी रोकथाम के लिए जागरूकता, शिक्षा, स्वच्छता और योजनाओं का समुचित क्रियान्वयन आवश्यक है। 

 

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