मार्गदर्शन का परिचय (Introduction to Guidance )

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मार्गदर्शन का परिचय | Introduction to Guidance |

 मार्गदर्शन (Guidence ):-

मार्गदर्शन (Guidance) एक व्यवस्थित और विकासात्मक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य व्यक्ति को अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों – जैसे शैक्षणिक, व्यावसायिक, व्यक्तिगत और सामाजिक – में सही निर्णय लेने और समस्याओं का समाधान करने में सहायता प्रदान करना है। यह प्रक्रिया व्यक्ति को आत्म-ज्ञान, आत्म-निर्भरता और आत्म-विकास की दिशा में प्रेरित करती है।

 मार्गदर्शन की परिभाषाएं:

🔹 जॉन्सन (Jones):
“मार्गदर्शन वह सहायता है जो एक व्यक्ति द्वारा दूसरे को विकल्प चुनने, समायोजन करने और समस्याओं को सुलझाने में दी जाती है।”

🔹 क्रॉन्स (Crow & Crow):
“मार्गदर्शन एक ऐसी सहायता है जो योग्य परामर्शदाताओं द्वारा किसी भी उम्र के व्यक्ति को अपने जीवन को दिशा देने, अपने दृष्टिकोण को विकसित करने और निर्णय लेने में दी जाती है।”

 मार्गदर्शन की मुख्य विशेषताएँ:-

✅ यह व्यक्ति-केंद्रित और विकासात्मक प्रक्रिया है।
✅ यह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है।
✅ इसका उद्देश्य आत्मनिर्भरता और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना है।
✅ यह सभी उम्र के व्यक्तियों के लिए उपयोगी है।
✅ मार्गदर्शन में गोपनीयता, सहानुभूति और विश्वास महत्वपूर्ण तत्व हैं।

 मार्गदर्शन के प्रमुख प्रकार:-

  1. शैक्षणिक मार्गदर्शन (Educational Guidance):
    छात्रों को विषय चयन, अध्ययन विधि, परीक्षा की तैयारी, स्कूल परिवर्तन आदि में सहायता प्रदान करना।
  2. व्यावसायिक मार्गदर्शन (Vocational Guidance):
    कैरियर की योजना, नौकरी चयन, कौशल विकास और भविष्य की संभावनाओं की जानकारी देना।
  3. व्यक्तिगत मार्गदर्शन (Personal Guidance):
    भावनात्मक तनाव, पारिवारिक समस्या, आत्मविश्वास की कमी या अन्य व्यक्तिगत परेशानियों का समाधान करना।

 मार्गदर्शन की आवश्यकता क्यों है?

🔸 शिक्षा और करियर के क्षेत्र में बढ़ती विविधता
🔸 प्रतिस्पर्धा और तनावपूर्ण जीवन शैली
🔸 आत्म-निर्णय की क्षमता का अभाव
🔸 मानसिक और सामाजिक चुनौतियाँ
🔸 व्यक्तित्व विकास और जीवन कौशल की आवश्यकता

 निष्कर्ष:-

मार्गदर्शन एक ऐसी मानवीय प्रक्रिया है जो व्यक्ति को अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने, उनकी दिशा तय करने और आत्मनिर्भर बनने में सहायता करती है। बी.एड. जैसे शिक्षक-प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि यह भावी शिक्षकों को अपने छात्रों के सर्वांगीण विकास में समर्थ बनाता है।

 

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